मौन पीएम, विदेशी कर्ज और रुपयें की गिरती कीमत

Vikas Kumar Gupta   आजादी पश्चात् हमारे ऊपर न तो कर्जा था न हमारी मुद्रा डाॅलर से कमतर थी। हां एक चीज थी वह अंग्रेजी चारण भाटों की मौजूदगी। फिर क्या इन्हीं चारण भाटों की बदौलत विदेशी ताकतें अपनी नीतियों, लूट के दुष्चक्र को दुबारा यहां फैलाने में सफल हुईं… 26 सितम्बर 1932 को पंजाब [...]

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Source: Weekly Blitz :: Writings


 

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